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पाठ के लाभ
- ✦ प्रतिदिन इस आरती के गायन से घर में मंगल और शांति आती है
- ✦ सातों दिन माँ काली की कृपा बनी रहती है
- ✦ भय, चिंता और संकट दूर होते हैं
- ✦ परिवार में खुशहाली और समृद्धि आती है
दृश्य:
अ:
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े।
पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरे॥
सुन जगदम्बे न कर विलम्बे, संतन के भंडार भरे।
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
ॐ
बुद्धि विधाता तू जग माता, मेरा कारज सिद्ध करे।
चरण कमल का लिया आसरा, शरण तुम्हारी आन पड़े॥
जब-जब भीड़ पड़ी भक्तन पर, तब-तब आप सहाय करे।
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
ॐ
गुरु के वार सकल जग मोहयो, तरुणी रूप अनूप धरे।
माता होकर पुत्र खिलावे, कहीं भार्या भोग करे॥
शुक्र सुखदाई सदा सहाई, संत खड़े जयकार करे।
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
ॐ
ब्रह्मा विष्णु महेश फल लिये, भेंट देन तेरे द्वार खड़े।
अटल सिंहासन बैठी मेरी माता, सिर सोने का छत्र फिरे॥
वार शनिचर कुमकुम बरणो, जब लुंकड़ पर हुकुम करे।
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
ॐ
खड्ग खप्पर त्रिशूल हाथ लिये, रक्त बीज को भस्म करे।
शुम्भ-निशुम्भ को क्षण में मारे, महिषासुर को पकड़ दले॥
आदित वारी आदि भवानी, जन अपने को कष्ट हरे।
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
ॐ
कुपित होकर दानव मारे, चण्ड-मुण्ड सब चूर करे।
जब तुम देखी दया रूप हो, पल में संकट दूर करे॥
सौम्य स्वभाव धरयो मेरी माता, जन की अर्ज कबूल करे।
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
ॐ
सात बार की महिमा बणनी, सब गुण कौन बखान करे।
सिंह पीठ पर चढ़ी भवानी, अटल भवन में राज्य करे॥
दर्शन पावे मंगल गावे, सिद्ध साधक तेरी भेंट धरे।
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
ॐ
ब्रह्मा वेद पढ़े तेरे द्वारे, शिव शंकर हरी ध्यान धरे।
इन्द्र कृष्ण तेरी करे आरती, चँवर कुबेर डुलाय रहे॥
जय जननी जय मातु भवानी, अटल भवन में राज्य करे।
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े।
↳ हे देवी! इस मंगलकारी सेवा को सुनो — हाथ जोड़कर तेरे द्वार पर खड़े हैं
पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरे॥
↳ पान, सुपारी, ध्वजा और नारियल लेकर — दीपक की ज्वाला के साथ तेरे सामने भेंट धर रहे हैं
सुन जगदम्बे न कर विलम्बे, संतन के भंडार भरे।
↳ हे जगदम्बा, सुनो — देर मत करो, अपने भक्त-संतों के भंडार भर दो
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
↳ संतों की पालन-पोषण करने वाली, सदा खुशहाली देने वाली — जय हो काली माँ, सबका कल्याण करो
ॐ
बुद्धि विधाता तू जग माता, मेरा कारज सिद्ध करे।
↳ तू बुद्धि देने वाली और जगत की माता है — मेरे सारे काम सफल करो
चरण कमल का लिया आसरा, शरण तुम्हारी आन पड़े॥
↳ तेरे चरण-कमलों का आसरा लिया है — तेरी शरण में आ पड़े हैं
जब-जब भीड़ पड़ी भक्तन पर, तब-तब आप सहाय करे।
↳ जब-जब भक्तों पर संकट आया — तब-तब तूने स्वयं आकर सहायता की
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
↳ संतों की पालन-पोषण करने वाली, सदा खुशहाली देने वाली — जय हो काली माँ, सबका कल्याण करो
ॐ
गुरु के वार सकल जग मोहयो, तरुणी रूप अनूप धरे।
↳ गुरुवार को सारे जग को मोहित कर लिया — अनुपम तरुणी रूप धारण करके
माता होकर पुत्र खिलावे, कहीं भार्या भोग करे॥
↳ कहीं माता बनकर पुत्र को पालती हो — कहीं गृहस्थी में भार्या रूप में हो (तुम सृष्टि के हर रूप में हो)
शुक्र सुखदाई सदा सहाई, संत खड़े जयकार करे।
↳ शुक्रवार को सुख देने वाली, सदा सहायक — संत खड़े होकर जयकार करते हैं
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
↳ संतों की पालन-पोषण करने वाली, सदा खुशहाली देने वाली — जय हो काली माँ, सबका कल्याण करो
ॐ
ब्रह्मा विष्णु महेश फल लिये, भेंट देन तेरे द्वार खड़े।
↳ ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) फल लेकर — तुझे भेंट देने तेरे द्वार पर खड़े हैं
अटल सिंहासन बैठी मेरी माता, सिर सोने का छत्र फिरे॥
↳ मेरी माता अटल सिंहासन पर विराजमान हैं — सिर पर सोने का छत्र घूम रहा है
वार शनिचर कुमकुम बरणो, जब लुंकड़ पर हुकुम करे।
↳ शनिवार को कुमकुम वर्ण (लाल) रूप में — जब प्रचंड शक्तियों पर आज्ञा फरमाती हैं
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
↳ संतों की पालन-पोषण करने वाली, सदा खुशहाली देने वाली — जय हो काली माँ, सबका कल्याण करो
ॐ
खड्ग खप्पर त्रिशूल हाथ लिये, रक्त बीज को भस्म करे।
↳ खड्ग, खप्पर और त्रिशूल हाथ में लिए — रक्तबीज राक्षस को भस्म कर दिया
शुम्भ-निशुम्भ को क्षण में मारे, महिषासुर को पकड़ दले॥
↳ शुम्भ और निशुम्भ को पल भर में मारा — महिषासुर को पकड़कर नष्ट कर दिया
आदित वारी आदि भवानी, जन अपने को कष्ट हरे।
↳ रविवार (आदित्यवार) की आदि भवानी — अपने भक्त-जनों का कष्ट हरती हैं
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
↳ संतों की पालन-पोषण करने वाली, सदा खुशहाली देने वाली — जय हो काली माँ, सबका कल्याण करो
ॐ
कुपित होकर दानव मारे, चण्ड-मुण्ड सब चूर करे।
↳ क्रोधित होकर दानवों को मारा — चण्ड और मुण्ड को चूर-चूर कर दिया
जब तुम देखी दया रूप हो, पल में संकट दूर करे॥
↳ जब तुम करुणामय दया-स्वरूप हो जाती हो — पल भर में भक्त का संकट दूर हो जाता है
सौम्य स्वभाव धरयो मेरी माता, जन की अर्ज कबूल करे।
↳ सौम्य और शांत स्वभाव धारण कर मेरी माता — अपने भक्त-जनों की विनती स्वीकार करती हैं
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
↳ संतों की पालन-पोषण करने वाली, सदा खुशहाली देने वाली — जय हो काली माँ, सबका कल्याण करो
ॐ
सात बार की महिमा बणनी, सब गुण कौन बखान करे।
↳ सातों दिन (वारों) की महिमा का वर्णन हुआ — माँ के सब गुणों को कौन बयान कर सकता है?
सिंह पीठ पर चढ़ी भवानी, अटल भवन में राज्य करे॥
↳ सिंह की पीठ पर सवार भवानी — अटल और अविनाशी भवन में राज्य करती हैं
दर्शन पावे मंगल गावे, सिद्ध साधक तेरी भेंट धरे।
↳ जो दर्शन पाते हैं वे मंगल गीत गाते हैं — सिद्ध साधक तेरे सामने भेंट धरते हैं
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
↳ संतों की पालन-पोषण करने वाली, सदा खुशहाली देने वाली — जय हो काली माँ, सबका कल्याण करो
ॐ
ब्रह्मा वेद पढ़े तेरे द्वारे, शिव शंकर हरी ध्यान धरे।
↳ ब्रह्मा जी तेरे द्वार पर वेद पढ़ते हैं — शिव-शंकर और हरि (विष्णु) तेरा ध्यान धरते हैं
इन्द्र कृष्ण तेरी करे आरती, चँवर कुबेर डुलाय रहे॥
↳ इन्द्र और कृष्ण तेरी आरती उतारते हैं — कुबेर चँवर (चामर) डुलाते रहते हैं
जय जननी जय मातु भवानी, अटल भवन में राज्य करे।
↳ जय हो जननी! जय हो मातु भवानी! — अटल भवन में राज्य करती हो
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
↳ संतों की पालन-पोषण करने वाली, सदा खुशहाली देने वाली — जय हो काली माँ, सबका कल्याण करो
📖
अर्थ
हे देवी! इस मंगलकारी सेवा को सुनो — हाथ जोड़कर तेरे द्वार पर खड़े हैं
पान, सुपारी, ध्वजा और नारियल लेकर — दीपक की ज्वाला के साथ तेरे सामने भेंट धर रहे हैं
हे जगदम्बा, सुनो — देर मत करो, अपने भक्त-संतों के भंडार भर दो
संतों की पालन-पोषण करने वाली, सदा खुशहाली देने वाली — जय हो काली माँ, सबका कल्याण करो
तू बुद्धि देने वाली और जगत की माता है — मेरे सारे काम सफल करो
तेरे चरण-कमलों का आसरा लिया है — तेरी शरण में आ पड़े हैं
जब-जब भक्तों पर संकट आया — तब-तब तूने स्वयं आकर सहायता की
संतों की पालन-पोषण करने वाली, सदा खुशहाली देने वाली — जय हो काली माँ, सबका कल्याण करो
गुरुवार को सारे जग को मोहित कर लिया — अनुपम तरुणी रूप धारण करके
कहीं माता बनकर पुत्र को पालती हो — कहीं गृहस्थी में भार्या रूप में हो (तुम सृष्टि के हर रूप में हो)
शुक्रवार को सुख देने वाली, सदा सहायक — संत खड़े होकर जयकार करते हैं
संतों की पालन-पोषण करने वाली, सदा खुशहाली देने वाली — जय हो काली माँ, सबका कल्याण करो
ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) फल लेकर — तुझे भेंट देने तेरे द्वार पर खड़े हैं
मेरी माता अटल सिंहासन पर विराजमान हैं — सिर पर सोने का छत्र घूम रहा है
शनिवार को कुमकुम वर्ण (लाल) रूप में — जब प्रचंड शक्तियों पर आज्ञा फरमाती हैं
संतों की पालन-पोषण करने वाली, सदा खुशहाली देने वाली — जय हो काली माँ, सबका कल्याण करो
खड्ग, खप्पर और त्रिशूल हाथ में लिए — रक्तबीज राक्षस को भस्म कर दिया
शुम्भ और निशुम्भ को पल भर में मारा — महिषासुर को पकड़कर नष्ट कर दिया
रविवार (आदित्यवार) की आदि भवानी — अपने भक्त-जनों का कष्ट हरती हैं
संतों की पालन-पोषण करने वाली, सदा खुशहाली देने वाली — जय हो काली माँ, सबका कल्याण करो
क्रोधित होकर दानवों को मारा — चण्ड और मुण्ड को चूर-चूर कर दिया
जब तुम करुणामय दया-स्वरूप हो जाती हो — पल भर में भक्त का संकट दूर हो जाता है
सौम्य और शांत स्वभाव धारण कर मेरी माता — अपने भक्त-जनों की विनती स्वीकार करती हैं
संतों की पालन-पोषण करने वाली, सदा खुशहाली देने वाली — जय हो काली माँ, सबका कल्याण करो
सातों दिन (वारों) की महिमा का वर्णन हुआ — माँ के सब गुणों को कौन बयान कर सकता है?
सिंह की पीठ पर सवार भवानी — अटल और अविनाशी भवन में राज्य करती हैं
जो दर्शन पाते हैं वे मंगल गीत गाते हैं — सिद्ध साधक तेरे सामने भेंट धरते हैं
संतों की पालन-पोषण करने वाली, सदा खुशहाली देने वाली — जय हो काली माँ, सबका कल्याण करो
ब्रह्मा जी तेरे द्वार पर वेद पढ़ते हैं — शिव-शंकर और हरि (विष्णु) तेरा ध्यान धरते हैं
इन्द्र और कृष्ण तेरी आरती उतारते हैं — कुबेर चँवर (चामर) डुलाते रहते हैं
जय हो जननी! जय हो मातु भवानी! — अटल भवन में राज्य करती हो
संतों की पालन-पोषण करने वाली, सदा खुशहाली देने वाली — जय हो काली माँ, सबका कल्याण करो
परिचय
यह आरती माँ काली की सबसे प्रसिद्ध और प्रिय आरतियों में से एक है। इसमें सातों वारों (दिनों) में माँ के अलग-अलग स्वरूपों का वर्णन है — गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवार — हर दिन माँ का एक विशेष रूप भक्तों पर कृपा करता है।
गायन विधि: सभी परिवारजन मिलकर दीपक की थाल सजाएँ। हर अंतरे के बाद “संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे” की पंक्ति सब मिलकर गाएँ।