माँ काली — आदिशक्ति का वह दिव्य स्वरूप जो सर्वाधिक शक्तिशाली और सर्वाधिक करुणामय है। उनका नाम “काल” से उत्पन्न है — वे समय से परे, सनातन और अविनाशी हैं।
रूप का आध्यात्मिक अर्थ: माँ काली का श्याम वर्ण ब्रह्मांड के अनंत आकाश का प्रतीक है — जिसमें सब कुछ समाया हुआ है। उनके मुक्त केश प्रकृति की स्वतंत्र ऊर्जा के प्रतीक हैं। एक हाथ में खड्ग दुष्टता का नाश करती है, दूसरा हाथ अभय मुद्रा में भक्तों को भय से मुक्ति देता है। शिव जी के वक्ष पर चरण — शक्ति और शिव का मिलन, चेतना और ऊर्जा का संगम।
पूजा का दिन: शनिवार, अमावस्या, नवरात्रि, काली पूजा
मुख्य मंत्र: ॐ कालिकायै नमः
ॐ
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आरती
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चालीसा
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मंत्र
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