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📖 चालीसा

काली चालीसा

⏱ 20-25 मिनट 🗓 शनिवार, अमावस्या, और काली पूजा के दिन — रात्रि में दीपक जलाकर
🌟

पाठ के लाभ

दृश्य:
अ:
॥ दोहा ॥
जय काली कंकाल धारिणी, मुण्डमाल गल सोय।
चरण शरण जो आए तेरे, भव सागर तर जोय।।
॥ चौपाई ॥
जय महाकाली जय जगदम्बे, जय भवानी जय जगत सम्बे।
काल वर्णा तव रूप निराला, नयन लाल जटा जूट विशाला।
खुले केश लहराएँ काली, रण में हो तुम सबसे आगे वाली।
त्रिनेत्र धारिणी त्रिशूल हाथ, सदा रहो हे माँ हमारे साथ।
खड्ग कर में खप्पर सजाए, असुरों का नाश तुम्ही लाए।
महिषासुर को तुमने मारा, देवों को दिया नया सहारा।
रक्तबीज को किया संहारा, पिया उसका रक्त सारा।
एक बूँद भू पर न गिरने दी, असुर से सृष्टि को मुक्त करी दी।
दक्षिण काली नाम तुम्हारा, दक्षिण दिशा में वास तुम्हारा।
श्यामा काली श्याम वर्णी, तम को हरने वाली तारणी।
भद्रकाली भद्र करने वाली, भक्तों की सब पीड़ा टालने वाली।
श्मशान काली स्मशान विहारी, मसान में बैठो रात अंधियारी।
शिव के ऊपर चरण धरो, तांडव लीला जग को दिखाओ।
शिव शक्ति के मिलन से सृष्टि, दोनों के बिन नहीं कोई दृष्टि।
तुम्हीं हो ब्रह्म की आदि शक्ति, तुम्हीं से होती जग की मुक्ति।
दस महाविद्या में तुम प्रथम, शक्ति साधना का तुम ही क्रम।
तारा तुम दूसरी महाविद्या, तुम्हीं से मिलती सब आत्मविद्या।
षोडशी त्रिपुरा सुंदरी रूपा, तुम्हीं हो माँ सौंदर्य की धूपा।
भुवनेश्वरी जगत की ईश्वरी, तुम्हीं हो संसार की अधिश्वरी।
छिन्नमस्ता का रूप विचित्र, तुम्हीं करो भक्तों का चरित्र।
त्रिपुर भैरवी भय की हारी, धूमावती दुखों की मारी।
बगलामुखी शत्रु विनाशिनी, मातंगी मतवाली मोहिनी।
कमला लक्ष्मी सुख देने वाली, दस महाविद्या जग पालने वाली।
काली तुम्हीं दसों की माता, सब शक्तियों की तुम विधाता।
काली घाट में तुम्हारा डेरा, कलकत्ते में लगे जहाँ घेरा।
दक्षिणेश्वर में तुम्हारा मंदिर, भक्त रामकृष्ण का हो अंदर।
रामकृष्ण ने तुम्हें पुकारा, माँ बन उनको अपना उतारा।
विवेकानंद को दिया वरदान, जग में फैलाया माँ का ज्ञान।
एकावन शक्तिपीठ तुम्हारे, सती के अंग जहाँ-जहाँ बिखरे।
हर पीठ में तुम्हारी महिमा, हर क्षेत्र में अपार गरिमा।
नवरात्र में तुम्हारी पूजा, जग में नहीं तुम-सा कोई दूजा।
काली पूजा अमावस की रात, तब तुम आओ भक्त के साथ।
तंत्र मंत्र की तुम अधिष्ठात्री, साधक की तुम परम भिक्षात्री।
वामाचारी तुम्हें मनाते, पंचमकार से भोग लगाते।
दक्षिणाचारी भी पूजें तुमको, फूल अक्षत अर्पण करें प्रभु को।
जो भी मन से तुम्हें ध्याए, उसकी सब मनोकामना पाए।
भय हर लो माँ हमारा भय, जीवन में आए नव उदय।
रोग दोष और शत्रु नाशो, भक्त के जीवन में सुख राशो।
धन धान्य दो मोक्ष भी दो माँ, जनम मरण का चक्र भी हरो माँ।
चरण कमल में स्थान दो माँ, तुम्हारी भक्ति का वरदान दो माँ।
जो नित काली चालीसा पढ़े, भक्ति मार्ग पर वह दृढ़ बढ़े।
चालीस चौपाई पूर्ण हुई, माँ काली की महिमा जानी नई।
॥ दोहा ॥
काली माँ के चरणों में, अर्पित यह चालीसा आज।
भव बंधन से मुक्त करो माँ, यही है मन की आवाज़।।
॥ दोहा ॥
↳ यह काली चालीसा का प्रारंभिक दोहा है।
जय काली कंकाल धारिणी, मुण्डमाल गल सोय।
↳ हे माँ काली, आप कंकाल की माला धारण करती हैं और आपके गले में मुण्डों की माला सुशोभित है।
चरण शरण जो आए तेरे, भव सागर तर जोय।।
↳ जो भक्त आपके चरणों की शरण में आता है, वह इस संसार-सागर से पार हो जाता है।
॥ चौपाई ॥
↳ अब काली चालीसा की चौपाइयाँ प्रारंभ होती हैं।
जय महाकाली जय जगदम्बे, जय भवानी जय जगत सम्बे।
↳ हे महाकाली, हे जगत की माता, हे भवानी — आपकी जय हो। आप सम्पूर्ण जगत की माता हैं।
काल वर्णा तव रूप निराला, नयन लाल जटा जूट विशाला।
↳ आपका रूप कालेपन से युक्त और अनोखा है। आपकी आँखें लाल हैं और जटाएँ विशाल हैं।
खुले केश लहराएँ काली, रण में हो तुम सबसे आगे वाली।
↳ आपके खुले केश हवा में लहराते हैं। युद्ध के मैदान में आप सबसे आगे रहती हैं।
त्रिनेत्र धारिणी त्रिशूल हाथ, सदा रहो हे माँ हमारे साथ।
↳ आपके तीन नेत्र हैं और हाथ में त्रिशूल है। हे माँ, आप सदा हमारे साथ रहें।
खड्ग कर में खप्पर सजाए, असुरों का नाश तुम्ही लाए।
↳ आपके एक हाथ में तलवार है और दूसरे में खप्पर। आप ही असुरों का संहार करती हैं।
महिषासुर को तुमने मारा, देवों को दिया नया सहारा।
↳ आपने महिषासुर राक्षस का वध किया और देवताओं को नया संबल प्रदान किया।
रक्तबीज को किया संहारा, पिया उसका रक्त सारा।
↳ रक्तबीज राक्षस का वध करते समय आपने उसका सारा रक्त पी लिया ताकि वह फिर जन्म न ले सके।
एक बूँद भू पर न गिरने दी, असुर से सृष्टि को मुक्त करी दी।
↳ रक्त की एक बूँद भी धरती पर नहीं गिरने दी, और इस प्रकार सृष्टि को उस राक्षस के आतंक से मुक्त किया।
दक्षिण काली नाम तुम्हारा, दक्षिण दिशा में वास तुम्हारा।
↳ दक्षिणकाली आपका एक प्रमुख नाम है। दक्षिण दिशा आपका विशेष स्थान मानी जाती है।
श्यामा काली श्याम वर्णी, तम को हरने वाली तारणी।
↳ श्यामकाली के नाम से आप जानी जाती हैं। आप श्याम रंग की हैं और अंधकार को हरने वाली हैं।
भद्रकाली भद्र करने वाली, भक्तों की सब पीड़ा टालने वाली।
↳ भद्रकाली के रूप में आप भक्तों का कल्याण करती हैं और उनकी सभी पीड़ाएँ दूर करती हैं।
श्मशान काली स्मशान विहारी, मसान में बैठो रात अंधियारी।
↳ श्मशानकाली के रूप में आप श्मशान में विचरण करती हैं और अंधेरी रात में वहाँ विराजती हैं।
शिव के ऊपर चरण धरो, तांडव लीला जग को दिखाओ।
↳ आप भगवान शिव के वक्ष पर खड़ी हैं और अपनी तांडव लीला से जगत को दर्शन देती हैं।
शिव शक्ति के मिलन से सृष्टि, दोनों के बिन नहीं कोई दृष्टि।
↳ शिव और शक्ति के मिलन से ही सृष्टि का निर्माण हुआ है। दोनों के बिना जगत की कोई व्यवस्था नहीं।
तुम्हीं हो ब्रह्म की आदि शक्ति, तुम्हीं से होती जग की मुक्ति।
↳ आप ही ब्रह्म की आदिशक्ति हैं। आपसे ही जगत को मुक्ति मिलती है।
दस महाविद्या में तुम प्रथम, शक्ति साधना का तुम ही क्रम।
↳ दस महाविद्याओं में आप पहली और प्रमुख हैं। शक्ति की साधना का क्रम आपसे ही प्रारंभ होता है।
तारा तुम दूसरी महाविद्या, तुम्हीं से मिलती सब आत्मविद्या।
↳ तारा महाविद्या के रूप में भी आप जानी जाती हैं। आपसे ही आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है।
षोडशी त्रिपुरा सुंदरी रूपा, तुम्हीं हो माँ सौंदर्य की धूपा।
↳ षोडशी और त्रिपुरसुंदरी के रूप में आप सौंदर्य की अधिष्ठात्री हैं।
भुवनेश्वरी जगत की ईश्वरी, तुम्हीं हो संसार की अधिश्वरी।
↳ भुवनेश्वरी के रूप में आप जगत की स्वामिनी हैं। सम्पूर्ण संसार आपके अधीन है।
छिन्नमस्ता का रूप विचित्र, तुम्हीं करो भक्तों का चरित्र।
↳ छिन्नमस्ता का रूप अत्यंत विचित्र है। आप अपने भक्तों का चरित्र उज्जवल करती हैं।
त्रिपुर भैरवी भय की हारी, धूमावती दुखों की मारी।
↳ त्रिपुरभैरवी भय का नाश करती हैं। धूमावती दुखों और कष्टों को दूर करती हैं।
बगलामुखी शत्रु विनाशिनी, मातंगी मतवाली मोहिनी।
↳ बगलामुखी शत्रुओं का नाश करती हैं। मातंगी मतवाली और मोहिनी शक्ति की देवी हैं।
कमला लक्ष्मी सुख देने वाली, दस महाविद्या जग पालने वाली।
↳ कमला अर्थात लक्ष्मी सुख-सम्पत्ति देती हैं। ये दसों महाविद्याएँ मिलकर जगत का पालन करती हैं।
काली तुम्हीं दसों की माता, सब शक्तियों की तुम विधाता।
↳ माँ काली इन दसों महाविद्याओं की जननी हैं। सभी शक्तियों का स्रोत आप ही हैं।
काली घाट में तुम्हारा डेरा, कलकत्ते में लगे जहाँ घेरा।
↳ कोलकाता के कालीघाट मंदिर में आपका विशेष निवास है। वहाँ सदा भक्तों का जमावड़ा रहता है।
दक्षिणेश्वर में तुम्हारा मंदिर, भक्त रामकृष्ण का हो अंदर।
↳ दक्षिणेश्वर के मंदिर में आप विराजती हैं जहाँ परमहंस रामकृष्ण ने आपकी आराधना की थी।
रामकृष्ण ने तुम्हें पुकारा, माँ बन उनको अपना उतारा।
↳ परमहंस रामकृष्ण ने आपको माँ कहकर पुकारा और आपने उनके सामने अपना साक्षात रूप प्रकट किया।
विवेकानंद को दिया वरदान, जग में फैलाया माँ का ज्ञान।
↳ आपकी कृपा से विवेकानंद को ज्ञान का वरदान मिला और उन्होंने सारे जगत में माँ का ज्ञान फैलाया।
एकावन शक्तिपीठ तुम्हारे, सती के अंग जहाँ-जहाँ बिखरे।
↳ जहाँ-जहाँ सती के अंग गिरे, वहाँ-वहाँ शक्तिपीठ स्थापित हुए। ये इक्यावन पीठ आपके पवित्र स्थान हैं।
हर पीठ में तुम्हारी महिमा, हर क्षेत्र में अपार गरिमा।
↳ हर शक्तिपीठ में आपकी महिमा व्याप्त है और हर क्षेत्र में आपकी अपार गरिमा है।
नवरात्र में तुम्हारी पूजा, जग में नहीं तुम-सा कोई दूजा।
↳ नवरात्र के पवित्र दिनों में आपकी विशेष पूजा-अर्चना होती है। इस जगत में आप जैसा कोई दूसरा नहीं।
काली पूजा अमावस की रात, तब तुम आओ भक्त के साथ।
↳ अमावस्या की रात को काली पूजा होती है। उस रात आप अपने भक्त के पास आती हैं और उन्हें आशीष देती हैं।
तंत्र मंत्र की तुम अधिष्ठात्री, साधक की तुम परम भिक्षात्री।
↳ तंत्र और मंत्र की साधना में आप ही मुख्य देवी हैं। साधकों को आप ही सिद्धि प्रदान करती हैं।
वामाचारी तुम्हें मनाते, पंचमकार से भोग लगाते।
↳ वामाचार मार्ग के साधक आपको पंचमकार की साधना से मनाते हैं और आपको प्रसन्न करते हैं।
दक्षिणाचारी भी पूजें तुमको, फूल अक्षत अर्पण करें प्रभु को।
↳ दक्षिणाचार मार्ग के भक्त भी आपकी पूजा करते हैं और फूल व अक्षत चढ़ाते हैं।
जो भी मन से तुम्हें ध्याए, उसकी सब मनोकामना पाए।
↳ जो भक्त सच्चे मन से आपका ध्यान करता है, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
भय हर लो माँ हमारा भय, जीवन में आए नव उदय।
↳ हे माँ, हमारे मन का सभी भय हर लो और हमारे जीवन में नई सुबह आने दो।
रोग दोष और शत्रु नाशो, भक्त के जीवन में सुख राशो।
↳ हमारे रोग, दोष और शत्रुओं का नाश करो और भक्त के जीवन में सुख का भण्डार भर दो।
धन धान्य दो मोक्ष भी दो माँ, जनम मरण का चक्र भी हरो माँ।
↳ हे माँ, धन और अनाज दो, मोक्ष भी दो। जन्म-मृत्यु के इस चक्र से भी हमें मुक्त करो।
चरण कमल में स्थान दो माँ, तुम्हारी भक्ति का वरदान दो माँ।
↳ अपने चरण-कमलों में हमें स्थान दो। आपकी सच्ची भक्ति का वरदान हमें प्रदान करो।
जो नित काली चालीसा पढ़े, भक्ति मार्ग पर वह दृढ़ बढ़े।
↳ जो व्यक्ति प्रतिदिन काली चालीसा का पाठ करता है, वह भक्ति के मार्ग पर दृढ़ता से आगे बढ़ता है।
चालीस चौपाई पूर्ण हुई, माँ काली की महिमा जानी नई।
↳ इस चालीसा की चालीस चौपाइयाँ पूर्ण हुईं। माँ काली की महिमा हमने जानी।
॥ दोहा ॥
↳ यह काली चालीसा का समापन दोहा है।
काली माँ के चरणों में, अर्पित यह चालीसा आज।
↳ यह चालीसा माँ काली के चरणों में समर्पित है।
भव बंधन से मुक्त करो माँ, यही है मन की आवाज़।।
↳ हे माँ काली, इस संसार के बंधनों से हमें मुक्त करो — यही हमारे मन की सच्ची प्रार्थना है।
📖

अर्थ

यह काली चालीसा का प्रारंभिक दोहा है।
हे माँ काली, आप कंकाल की माला धारण करती हैं और आपके गले में मुण्डों की माला सुशोभित है।
जो भक्त आपके चरणों की शरण में आता है, वह इस संसार-सागर से पार हो जाता है।
अब काली चालीसा की चौपाइयाँ प्रारंभ होती हैं।
हे महाकाली, हे जगत की माता, हे भवानी — आपकी जय हो। आप सम्पूर्ण जगत की माता हैं।
आपका रूप कालेपन से युक्त और अनोखा है। आपकी आँखें लाल हैं और जटाएँ विशाल हैं।
आपके खुले केश हवा में लहराते हैं। युद्ध के मैदान में आप सबसे आगे रहती हैं।
आपके तीन नेत्र हैं और हाथ में त्रिशूल है। हे माँ, आप सदा हमारे साथ रहें।
आपके एक हाथ में तलवार है और दूसरे में खप्पर। आप ही असुरों का संहार करती हैं।
आपने महिषासुर राक्षस का वध किया और देवताओं को नया संबल प्रदान किया।
रक्तबीज राक्षस का वध करते समय आपने उसका सारा रक्त पी लिया ताकि वह फिर जन्म न ले सके।
रक्त की एक बूँद भी धरती पर नहीं गिरने दी, और इस प्रकार सृष्टि को उस राक्षस के आतंक से मुक्त किया।
दक्षिणकाली आपका एक प्रमुख नाम है। दक्षिण दिशा आपका विशेष स्थान मानी जाती है।
श्यामकाली के नाम से आप जानी जाती हैं। आप श्याम रंग की हैं और अंधकार को हरने वाली हैं।
भद्रकाली के रूप में आप भक्तों का कल्याण करती हैं और उनकी सभी पीड़ाएँ दूर करती हैं।
श्मशानकाली के रूप में आप श्मशान में विचरण करती हैं और अंधेरी रात में वहाँ विराजती हैं।
आप भगवान शिव के वक्ष पर खड़ी हैं और अपनी तांडव लीला से जगत को दर्शन देती हैं।
शिव और शक्ति के मिलन से ही सृष्टि का निर्माण हुआ है। दोनों के बिना जगत की कोई व्यवस्था नहीं।
आप ही ब्रह्म की आदिशक्ति हैं। आपसे ही जगत को मुक्ति मिलती है।
दस महाविद्याओं में आप पहली और प्रमुख हैं। शक्ति की साधना का क्रम आपसे ही प्रारंभ होता है।
तारा महाविद्या के रूप में भी आप जानी जाती हैं। आपसे ही आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है।
षोडशी और त्रिपुरसुंदरी के रूप में आप सौंदर्य की अधिष्ठात्री हैं।
भुवनेश्वरी के रूप में आप जगत की स्वामिनी हैं। सम्पूर्ण संसार आपके अधीन है।
छिन्नमस्ता का रूप अत्यंत विचित्र है। आप अपने भक्तों का चरित्र उज्जवल करती हैं।
त्रिपुरभैरवी भय का नाश करती हैं। धूमावती दुखों और कष्टों को दूर करती हैं।
बगलामुखी शत्रुओं का नाश करती हैं। मातंगी मतवाली और मोहिनी शक्ति की देवी हैं।
कमला अर्थात लक्ष्मी सुख-सम्पत्ति देती हैं। ये दसों महाविद्याएँ मिलकर जगत का पालन करती हैं।
माँ काली इन दसों महाविद्याओं की जननी हैं। सभी शक्तियों का स्रोत आप ही हैं।
कोलकाता के कालीघाट मंदिर में आपका विशेष निवास है। वहाँ सदा भक्तों का जमावड़ा रहता है।
दक्षिणेश्वर के मंदिर में आप विराजती हैं जहाँ परमहंस रामकृष्ण ने आपकी आराधना की थी।
परमहंस रामकृष्ण ने आपको माँ कहकर पुकारा और आपने उनके सामने अपना साक्षात रूप प्रकट किया।
आपकी कृपा से विवेकानंद को ज्ञान का वरदान मिला और उन्होंने सारे जगत में माँ का ज्ञान फैलाया।
जहाँ-जहाँ सती के अंग गिरे, वहाँ-वहाँ शक्तिपीठ स्थापित हुए। ये इक्यावन पीठ आपके पवित्र स्थान हैं।
हर शक्तिपीठ में आपकी महिमा व्याप्त है और हर क्षेत्र में आपकी अपार गरिमा है।
नवरात्र के पवित्र दिनों में आपकी विशेष पूजा-अर्चना होती है। इस जगत में आप जैसा कोई दूसरा नहीं।
अमावस्या की रात को काली पूजा होती है। उस रात आप अपने भक्त के पास आती हैं और उन्हें आशीष देती हैं।
तंत्र और मंत्र की साधना में आप ही मुख्य देवी हैं। साधकों को आप ही सिद्धि प्रदान करती हैं।
वामाचार मार्ग के साधक आपको पंचमकार की साधना से मनाते हैं और आपको प्रसन्न करते हैं।
दक्षिणाचार मार्ग के भक्त भी आपकी पूजा करते हैं और फूल व अक्षत चढ़ाते हैं।
जो भक्त सच्चे मन से आपका ध्यान करता है, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
हे माँ, हमारे मन का सभी भय हर लो और हमारे जीवन में नई सुबह आने दो।
हमारे रोग, दोष और शत्रुओं का नाश करो और भक्त के जीवन में सुख का भण्डार भर दो।
हे माँ, धन और अनाज दो, मोक्ष भी दो। जन्म-मृत्यु के इस चक्र से भी हमें मुक्त करो।
अपने चरण-कमलों में हमें स्थान दो। आपकी सच्ची भक्ति का वरदान हमें प्रदान करो।
जो व्यक्ति प्रतिदिन काली चालीसा का पाठ करता है, वह भक्ति के मार्ग पर दृढ़ता से आगे बढ़ता है।
इस चालीसा की चालीस चौपाइयाँ पूर्ण हुईं। माँ काली की महिमा हमने जानी।
यह काली चालीसा का समापन दोहा है।
यह चालीसा माँ काली के चरणों में समर्पित है।
हे माँ काली, इस संसार के बंधनों से हमें मुक्त करो — यही हमारे मन की सच्ची प्रार्थना है।

काली चालीसा माँ काली की स्तुति में रचित एक पवित्र स्तोत्र है जिसमें चालीस चौपाइयों और दो दोहों के माध्यम से माँ के दिव्य स्वरूप, उनके विभिन्न नामों, उनकी लीलाओं और उनकी असीम कृपा का वर्णन किया गया है। माँ काली दस महाविद्याओं में प्रथम और सर्वोच्च शक्ति हैं — काल-वर्णा, मुण्डमालिनी, खड्गधारिणी। वे सृष्टि की आदि-शक्ति हैं जो भगवान शिव के वक्ष पर विराजमान होकर जगत का संचालन करती हैं। रक्तबीज और महिषासुर जैसे दानवों का संहार कर उन्होंने सृष्टि की रक्षा की। जो भक्त श्रद्धापूर्वक इस चालीसा का पाठ करता है, उसे माँ काली की कृपा से भय, रोग, शत्रु-बाधा से मुक्ति मिलती है और अंततः मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।