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🕉 मंत्र

काली बीज मंत्र — ॐ क्रीं कालिकायै नमः

⏱ 15-20 मिनट (१०८ जाप) 🗓 प्रातःकाल स्नान के बाद या रात्रि में दीपक जलाकर, माला पर १०८ बार
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पाठ के लाभ

दृश्य:
अ:
ॐ क्रीं कालिकायै नमः।
करालवदनां घोरां मुक्तकेशीं चतुर्भुजाम्।
कालिकां दक्षिणां दिव्यां मुंडमालाविभूषिताम्॥
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोस्तुते॥
॥ ॐ क्रीं कालिकायै नमः ॥ (१०८ बार) ॥
ॐ क्रीं कालिकायै नमः।
↳ हे माँ कालिका! 'क्रीं' आपके महाशक्ति-स्वरूप का बीज है — मैं आपको नमस्कार करता / करती हूँ।
करालवदनां घोरां मुक्तकेशीं चतुर्भुजाम्।
↳ जिनका मुख विकराल और भयंकर है, जिनके केश खुले और स्वतंत्र हैं, जिनकी चार भुजाएँ हैं।
कालिकां दक्षिणां दिव्यां मुंडमालाविभूषिताम्॥
↳ वे दक्षिणाकाली दिव्य स्वरूपा हैं और मुंडमाला से विभूषित हैं — उनका ध्यान करता / करती हूँ।
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
↳ हे सभी मंगलों की मंगलस्वरूपा, हे कल्याणमयी, हे सभी पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली।
शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोस्तुते॥
↳ हे शरण देने वाली, हे तीन नेत्रों वाली गौरि, हे नारायणि — आपको बारम्बार नमस्कार है।
॥ ॐ क्रीं कालिकायै नमः ॥ (१०८ बार) ॥
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अर्थ

हे माँ कालिका! 'क्रीं' आपके महाशक्ति-स्वरूप का बीज है — मैं आपको नमस्कार करता / करती हूँ।
जिनका मुख विकराल और भयंकर है, जिनके केश खुले और स्वतंत्र हैं, जिनकी चार भुजाएँ हैं।
वे दक्षिणाकाली दिव्य स्वरूपा हैं और मुंडमाला से विभूषित हैं — उनका ध्यान करता / करती हूँ।
हे सभी मंगलों की मंगलस्वरूपा, हे कल्याणमयी, हे सभी पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली।
हे शरण देने वाली, हे तीन नेत्रों वाली गौरि, हे नारायणि — आपको बारम्बार नमस्कार है।

बीज मंत्र क्या होता है?

संस्कृत में “बीज” का अर्थ है बीज — वह सूक्ष्मतम इकाई जिसमें एक विशाल वृक्ष की समस्त शक्ति समाहित हो। बीज मंत्र एकाक्षर या अल्पाक्षर ध्वनियाँ हैं जो किसी देवी-देवता की संपूर्ण ऊर्जा को एक ध्वनि में समेट लेती हैं। ये मंत्र साधारण शब्द नहीं हैं — ये नाद-ब्रह्म के प्रत्यक्ष स्वरूप हैं।

क्रीं बीज — माँ काली का ह्रदय

“क्रीं” (Krīṃ) माँ काली का बीज मंत्र है। इसकी ध्वनि-संरचना तीन तत्त्वों से बनी है:

साथ मिलकर ये ध्वनियाँ अहंकार के नाश, माया से मुक्ति, और शुद्ध चेतना की जागृति का प्रतिनिधित्व करती हैं।

ध्यान विधि

माला पर जाप करते समय माँ का यह रूप मन में धारण करें: श्याम वर्ण, चतुर्भुजा, खड्ग और मुंड लिए, मुक्तकेशी, शिव के वक्ष पर खड़ी। प्रत्येक जाप के साथ भावना करें कि ‘क्रीं’ की ध्वनि मन के अहंकार, भय और अज्ञान को भस्म कर रही है।

जाप की संख्या: एक माला = १०८ बार। शनिवार या अमावस्या की रात्रि को ११ मालाओं का जाप विशेष फलदायी है।

श्री रामकृष्ण परमहंस ने माँ काली के इसी बीज मंत्र की साधना से सिद्धि प्राप्त की थी। वे कहते थे — “माँ! तू ही ज्ञान है, तू ही अज्ञान है — दोनों तू है।”