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पूजा विधि

काली माँ की सात्विक पूजा विधि

🗓 शनिवार, अमावस्या, नवरात्रि 30-45 मिनट ✦ सरल
🪔

पूजा सामग्री

माँ काली की मूर्ति या चित्र
लाल और सफेद फूल (गुड़हल, गेंदा, चमेली)
घी का दीपक

घी का दीप सात्विकता और पवित्रता का प्रतीक है — यह माँ के ज्योति-स्वरूप का आह्वान करता है।

धूप-अगरबत्ती
चंदन (सफेद या लाल)
कुमकुम और हल्दी
अक्षत (साबुत चावल)
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
नैवेद्य — मिठाई, फल, नारियल, खीर
पान और सुपारी
गंगाजल

गंगाजल परम पवित्र है — इससे पूजा स्थल और मन दोनों की शुद्धि होती है।

लाल वस्त्र (आसन के लिए)

माँ काली की सात्विक पूजा

माँ काली आदिशक्ति हैं — वे उतनी ही करुणामयी माँ हैं जितनी शक्तिशाली। उनकी सात्विक पूजा शुद्ध भक्ति, प्रेम और समर्पण से होती है। माँ को प्रसन्न करने के लिए किसी विशेष सामग्री की नहीं, बल्कि शुद्ध हृदय की आवश्यकता है।


चरण 1 — शुद्धि और संकल्प

स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें। माँ काली की मूर्ति या चित्र लाल वस्त्र पर स्थापित करें।

दोनों हाथ जोड़कर मन में संकल्प करें —

“माँ, मैं आपकी शरण में हूँ। अपनी अल्पबुद्धि से यह पूजा करता हूँ — कृपया स्वीकार करें।”

मंत्र: ॐ कालिकायै नमः


चरण 2 — दीप और धूप प्रज्वलन

घी का दीपक और धूप जलाएँ। दीपक जलाते समय मन में माँ का ध्यान करें — उनका करुणामय मुख, अभय देता हुआ हाथ।

मंत्र: दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥


चरण 3 — आवाहन

हाथ जोड़कर माँ काली का आह्वान करें। मन में उनके सौम्य रूप का ध्यान करें — वे माँ हैं, उनसे डर नहीं, प्रेम करें।

मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥


चरण 4 — पंचामृत स्नान

माँ की मूर्ति को क्रमश: दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराएँ। अंत में शुद्ध गंगाजल से स्नान कराएँ।

मंत्र: ॐ महाकाल्यै नमः — पंचामृतस्नानं समर्पयामि।


चरण 5 — वस्त्र और श्रृंगार

माँ को लाल वस्त्र अर्पित करें। चंदन, कुमकुम और हल्दी से श्रृंगार करें। लाल गुड़हल और अन्य फूलों की माला पहनाएँ।

मंत्र: ॐ कालिकायै नमः — वस्त्रं समर्पयामि।


चरण 6 — पुष्पार्चन

माँ के चरणों में फूल अर्पित करें। प्रत्येक फूल चढ़ाते समय उनका एक नाम लें —

काली, महाकाली, दुर्गा, भवानी, चंडी, अम्बे, जगदम्बा…

मंत्र: ॐ कालिकायै नमः — पुष्पाणि समर्पयामि।


चरण 7 — नैवेद्य

माँ को भोग लगाएँ — खीर, मिठाई, फल और नारियल। पान-सुपारी भी अर्पित करें।

भोग पूर्णतः सात्विक हो — माँ शुद्ध प्रेम से अर्पित भोग सर्वोपरि स्वीकार करती हैं।

मंत्र: ॐ कालिकायै नमः — नैवेद्यं समर्पयामि।


चरण 8 — आरती

काली माँ की आरती गाएँ। दीपक को धीरे-धीरे माँ के सम्मुख घुमाएँ — पहले पाँव से मस्तक तक, फिर मस्तक से पाँव तक।

पूरे परिवार के साथ आरती करना विशेष रूप से फलदायी है।


चरण 9 — चालीसा पाठ और जप

काली चालीसा का पाठ करें। माला पर माँ का नाम जपें —

मंत्र: ॐ कालिकायै नमः — जितनी बार मन चाहे, श्रद्धा से।


चरण 10 — प्रार्थना और विसर्जन

दोनों हाथ जोड़कर माँ से प्रार्थना करें। जो मन में हो — भय, चिंता, इच्छा — सब माँ के चरणों में रख दें।

प्रार्थना:

“माँ, आपके चरणों में मेरा प्रणाम। मेरे परिवार की रक्षा करें, मन में शक्ति दें, और इस जीवन में आपकी भक्ति बनी रहे।”

मंत्र: सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

पूजा समाप्ति पर माँ का धन्यवाद करें और प्रसाद परिवार में वितरित करें।


ध्यान रखें